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हाईकोर्ट ने राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के निदेशक को दिया अंतिम अवसर : कहा- सेवानिवृत्ति राशि से अवैध कटौती ठीक नहीं

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति देय राशि से “प्रोत्साहन अग्रिम”, “त्यौहार अग्रिम” और जीएसटी की कटौती पर कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी कटौती का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। निगम के कर्मचारी की सेवानिवृत्ति राशि से इस प्रकार की कटौती करना नियमविरुद्ध है।

उक्त आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने सतीश कुमार वर्मा सहित अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। सेवानिवृत्ति बकाया से इन मदों में कटौती किए जाने की बात पर न्यायालय आश्चर्यचकित है। बता दें कि वर्तमान याचिका न्यायालय के उस आदेश के अनुपालन न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की थी, जिसमें सेवानिवृत्ति देय राशि और वेतन बकाया के भुगतान का निर्देश दिया गया था। निगम की ओर से तर्क दिया गया कि सेवानिवृत्ति देय राशि का भुगतान कर दिया गया है, लेकिन वित्तीय संकट के कारण वेतन बकाया नहीं दिया जा सका।

हालांकि कोर्ट ने निगम द्वारा दाखिल हलफनामों का अवलोकन करते हुए पाया कि भुगतान की गई वास्तविक राशि और वेतन बकाया का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, बल्कि केवल “प्रोत्साहन अग्रिम”, “त्योहार अग्रिम” और जीएसटी के रूप में की गई कटौतियों का जिक्र है।

कोर्ट ने निगम के कार्यकारी निदेशक को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया कि सभी कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति बकाया का भुगतान उपर्युक्त अवैध कटौतियों के बिना सुनिश्चित किया जाए, साथ ही टिप्पणी की कि अधिकारी कर्मचारियों को उनका वैधानिक हक न देकर केवल समय व्यतीत कर रहे हैं और न्यायालय को गुमराह कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त कोर्ट ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव को संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जांच कर हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

Mukund Lekhni

मुकुंद लेखनी एक स्वतंत्र हिंदी समाचार पत्र एवं न्यूज पोर्टल है, जो देश-दुनिया, उत्तर प्रदेश और स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को तथ्य, निष्पक्षता और जनसरोकार के साथ पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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