उत्तर प्रदेशलखनऊ

आवास विकास की बड़ी सौगात, दाखिल खारिज शुल्क 97 प्रतिशत घटा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने अपने हजारों आवंटियों के हितों में बड़ा फैसला लिया है। परिषद ने संपत्तियों के दाखिल खारिज शुल्क में 97.5 प्रतिशत तक कमी कर दी है। गरीबों और मध्यम वर्ग के भवन स्वामियों के मकानों का दाखिल खारिज 200 से लेकर 500 रुपए में होगा। आवास आयुक्त अजय चौहान ने इसकी मंजूरी दे दी है। 27 अप्रैल को बोर्ड बैठक में मंजूरी मिलने के बाद मई से इसे लागू कर दिया जाएगा। आवास विकास परिषद ने प्रदेश भर की अपनी विभिन्न योजनाओं के लाखों आवंटियों को राहत देने का काम किया है। एक तरफ जहां कई सरकारी विभाग शुल्क में लगातार बढ़ोतरी करते जा रहे हैं वहीं आवास विकास की ओर से दी जा रही है ये राहत लोगों को काफी सुकून देगी।

फिलहाल आवास आयुक्त अजय चौहान ने अपने स्तर से संपत्तियों के दाखिल खारिज में राहत देने का फैसला किया है। हालांकि अंतिम फैसला बोर्ड की बैठक में 27 अप्रैल को होना है। अधिकारियों के मुताबिक बोर्ड से मंजूरी केवल औपचारिकता भर है। आवास विकास दाखिल खारिज में यह छूट न सिर्फ गरीबों और मध्यम वर्ग को देगा बल्कि सभी श्रेणी के भवन, भूखंड स्वामियों को भी देगा। पहले लोगों को दाखिल खारिज कराने के लिए 5000 से लेकर दो लाख तक देने पड़ते थे। मगर अब लोगों को 200 रुपए से अधिकतम 25000 तक ही दाखिल खारिज शुल्क के तौर पर देना होगा। आवास विकास के फैसले से बड़ी आबादी को राहत मिलेगी।

12560 फ्लैट खाली

आवास विकास की विभिन्न आवासीय योजनाओं में फिलहाल 12560 फ्लैट खाली हैं। इनके खरीदार नहीं मिल रहे हैं, इसीलिए परिषद ने कीमतें घटाई हैं। इन फ्लैटों में आवास विकास का 3543 करोड़ रुपए फंसा है।

विवाद से बचने को लाना होगा उत्तराधिकार प्रमाण

आवास विकास परिषद ने भविष्य में दाखिल खारिज के विवादों से भी लोगों को मुक्ति दिलाने की तैयारी की है। अभी तक परिवार के कई सदस्य होने पर सबकी सहमति से शपथ पत्र देने पर एक व्यक्ति के नाम दाखिल खारिज हो जाता था। बाद में इन परिवारों में आपस में विवाद पर संपत्ति के झगड़े होते थे। इससे आवास विकास भी प्रभावित होता था। इसे देखते हुए तय किया गया है कि अब परिषद उसी के नाम आवासीय,अनावासीय संपत्तियों का दाखिल खारिज करेगा, जो दीवानी न्यायालय से उत्तराधिकार ले आएगा। री-सेल में खरीदी गई संपत्तियों का दाखिल खारिज रजिस्ट्री के आधार पर ही होगा।

 27 अप्रैल को बोर्ड बैठक में मंजूरी मिलने के बाद मई से लागू हो जाएगा फैसला 

Mukund Lekhni

मुकुंद लेखनी एक स्वतंत्र हिंदी समाचार पत्र एवं न्यूज पोर्टल है, जो देश-दुनिया, उत्तर प्रदेश और स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को तथ्य, निष्पक्षता और जनसरोकार के साथ पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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